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जानिए ट्रेन से जानवर के काटने से रेलवे को कितना नुकसान होता है

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हर दिन ट्रेन से जानवरों के काटने की खबरें आती हैं। जानवरों के काटने से रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। जब ट्रेन जानवर के काटने पर रुकती है, तो डीजल पेट्रोल जलता रहता है, जिससे पैसे खर्च होते हैं और इसकी खपत बढ़ जाती है। यात्री और मालगाड़ी से जानवरों को काटने की लागत अलग है। जानवरों के काटने से ट्रेनें 15-15 मिनट लेट होती हैं और यात्रियों को इसके लिए भुगतान करना पड़ता है।

13,400 रुपये से 20,459 रुपये प्रति मिनट का नुकसान
आरटीआई की जानकारी के अनुसार, अगर डीजल से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन एक मिनट के लिए रुकती है, तो इससे 20401 रुपये का नुकसान होता है। वहीं, इलेक्ट्रिक ट्रेन में 20459 रुपये का नुकसान होता है। डीजल से चलने वाली गुड्स ट्रेन की लागत रु। एक मिनट के लिए 13334 और इलेक्ट्रिक ट्रेनों में 13392 रुपये का नुकसान होता है। ये नुकसान रेलवे को होता है।

यूपी में ट्रेन से जानवरों के कटने की घटनाएं बहुत होती हैं। पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में ट्रेन से जानवरों के काटने की कई घटनाएं होती हैं। रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन की बात करें तो 2016 से 2019 तक के चार सालों में 3090 जानवरों की मौत के बाद ट्रेन 15 मिनट लेट हो गई थी।

आगरा मंडल में 2014-15 से 2018-19 तक 3360 जानवरों को ट्रेन से काटा गया है। दूसरी ओर, झाँसी में भी इस समय के दौरान लगभग 4300 पशुओं को ट्रेन से काट दिया गया।

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