Vivo S60 Series Review: ₹40,000 में DSLR जैसा कैमरा! 3 वजहें क्यों ये फोन बवाल है और 2 कड़वे सच

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Vivo S60 Series Review: अगर आप आज के दौर में स्मार्टफोन मार्केट को देखें, तो हर दूसरा फोन एक जैसा दिखता है—वही चौकोर डिब्बा, वही बड़ा सा कैमरा बंप। लेकिन वीवो की S-सीरीज हमेशा से भीड़ से अलग दिखने के लिए जानी जाती है। कंपनी ने अपनी नई Vivo S60 Series को बाजार में उतारा है और दावा किया है कि यह फोन आपकी जेब में रखा एक छोटा-मोटा स्टूडियो है।

लेकिन क्या ₹35,000 से ₹45,000 की रेंज में आने वाली यह सीरीज सिर्फ रील्स बनाने वालों के लिए है या आम यूजर के लिए भी यह पैसा वसूल सौदा है? आइए बिना किसी घुमाव-फिराव के सीधे मुद्दे पर आते हैं।

वो 3 चीजें, जो आपको इस फोन से प्यार करने पर मजबूर कर देंगी

Vivo S60 Series camera looks

1. कैमरा नहीं, यह ‘जादू की छड़ी’ है!

अगर आपको तस्वीरें खिंचवाने का शौक है या आपके घर में किसी को इंस्टाग्राम पर रील और पोस्ट डालने की लत है, तो यह फोन आपके लिए ही बना है। वीवो ने इसके 50MP के फ्रंट और बैक कैमरे को इस तरह ट्यून किया है कि खराब से खराब रोशनी में भी यह आपकी फोटो को चमका देता है। इसका पोर्ट्रेट मोड तो ऐसा कमाल करता है कि बैकग्राउंड को बिल्कुल किसी महंगे DSLR कैमरे की तरह धुंधला (Blur) कर देता है। लड़कियां तो इसके ब्यूटी मोड और स्किन टोन मैनेजमेंट की दीवानी हो जाएंगी!

2. “भाई, फोन है या पंख?” (डिजाइन और डिस्प्ले)

इस फोन को हाथ में पकड़ते ही जो पहली आवाज आपके मुंह से निकलेगी, वो होगी—”वाह! यह फोन इतना पतला और हल्का है कि जींस की जेब में रखने पर पता भी नहीं चलता। इसकी 3D कर्व्ड डिस्प्ले जब किनारों से मुड़ती है, तो फोन चलाने का मज़ा दोगुना हो जाता है। धूप में भी इसकी स्क्रीन इतनी ब्राइट रहती है कि आपको आंखें सिकोड़कर देखने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

3. आधे घंटे का चार्ज, पूरे दिन का आराम

आजकल कई महंगे ब्रांड्स फोन के डिब्बे से चार्जर ही गायब कर देते हैं। लेकिन वीवो ने यहाँ दरियादिली दिखाई है। डिब्बे में मिलने वाला सुपरफास्ट फ्लैश चार्जर इस फोन को तब तक फुल चार्ज कर देता है जब तक आप सुबह उठकर चाय-नाश्ता खत्म करते हैं (मात्र 30 मिनट)। और 5000mAh की बड़ी बैटरी होने की वजह से आपको दिनभर चार्जर खोजने की टेंशन नहीं रहेगी।

वो 2 कड़वी बातें, जो वीवो वाले आपको कभी नहीं बताएंगे

Vivo S60 Series review

1. ₹40,000 के फोन में कचरा ऐप्स (Bloatware) क्यों?

जब कोई इंसान ₹40,000 खर्च करता है, तो वो उम्मीद करता है कि उसे एक साफ-सुथरा प्रीमियम सॉफ्टवेयर मिले। लेकिन वीवो के Funtouch OS में फोन ऑन करते ही आपको ‘Hot Apps’ और ‘Hot Games’ जैसे फालतू के फोल्डर्स और ऐप्स दिख जाएंगे जो बार-बार अजीबोगरीब नोटिफिकेशन भेजते हैं। हालांकि, आप इन्हें सेटिंग में जाकर बंद कर सकते हैं, लेकिन इस बजट में यह कबाड़ देखना मूड खराब करता है।

2. यह ‘कूल’ दिखता है, लेकिन भारी गेमिंग में ‘गर्म’ हो जाता है

सीधी बात यह है कि अगर आप सिर्फ इसलिए यह फोन खरीद रहे हैं कि आप इस पर दिन-रात भारी-भरकम गेम्स (जैसे BGMI या भारी ग्राफिक्स वाले गेम्स) खेलेंगे, तो रुक जाइए! इसका प्रोसेसर रोज के काम, यूट्यूब, रील स्क्रॉलिंग और मल्टीटास्किंग के लिए मक्खन है। लेकिन जब आप इस पर लगातार 1 घंटे गेमिंग करेंगे, तो यह पतला होने के कारण थोड़ा गर्म होने लगता है और गेम हल्का सा अटकने (Lag) लगता है।

आखिरी और सच्चा फैसला

Vivo S60 Series हर किसी के लिए नहीं बनी है, इसकी अपनी एक खास ऑडियंस है:

  • इसे आंख बंद करके ले लो: अगर आपके लिए कैमरा (खासकर सेल्फी और पोर्ट्रेट), प्रीमियम लुक, स्लिम डिजाइन और फास्ट चार्जिंग सबसे ऊपर हैं। इस मामले में इसका मुकाबला करना मुश्किल है।
  • इससे दूर रहो: अगर आप एक पक्के गेमर हैं, फोन को रफ-एंड-टफ इस्तेमाल करते हैं और आपको बिल्कुल साफ सॉफ्टवेयर (बिना फालतू ऐप्स वाला) पसंद है।
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