Kuldhara Village: कुलधरा गांव की भूतिया और वीरान होने की दास्तान

Kuldhara Village: भारत की जमीन में कई ऐसे राज दफन हैं जो कई सदियों बाद भी उतने ही अनसुलझे हैं। जितने पहले कभी हुआ करते थे, ये रहस्य कुछ ऐसे हैं। जिन्हें जितना सुलझाने की कोशिश की जाती है। यह उतना ही उलझते चले जाते हैं ऐसा ही एक राज जैसलमेर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर बसे कुलधरा गांव में भी दफन है जो कि पिछले 200 सालों से वीरान हैं। तो आइए आज हम जानते हैं।

भारत की सबसे भूतिया जगहों में से एक माने जाने वाले कुलधरा गांव में जिसको रातों रात 5000 लोग हमेशा के लिए छोड़कर चले गए थे। कुलधरा पहुंचने के लिए आप अपने निजी वाहन से या जैसलमेर से कैब लेकर भी आ सकते हैं। बताया जाता है कि कई स सालों पहले पालीवाल ब्राह्मण समा के लोग जैसलमेर में बस गए थे और फिर उन्होंने सरस्वती नदी के किनारे इस कुलधरा गांव को बसाया था। एक ब्राह्मण कदान ने सबसे पहले इस जगह पर अपना घर बनाया था।

Kuldhara Village

और साथ में एक तालाब भी खोदा था जिसका नाम उसने उ उधन सर रखा था करीब 200 साल पहले जब कुलधरा खंडहर नहीं था। तब इस क्षेत्र के आसपास के 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों से आबाद हुआ करते थे। लेकिन फिर जैसे कुलधरा को किसी की बुरी नजर लग गई व शख्स था। जैसलमेर रियासत का दीवान सालम सिंह जिसको लोग सालिम सिंह या सलीम सिंह नाम से भी बुलाया करते थे। जो गांव वालों से अवैध तरीके से कर यानी टैक्स की वसूली करता था। अयाश सालम सिंह की गंदी नजर गांव के मुखिया की खूबसूरत लड़की पर पड़ गई थी और वो उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि बस किसी भी तरह से उसे पा लेना चाहता था।

उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि अगर अगले पूर्ण मासे तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह लड़की को उठा ले जाएगा और गांव में कत्लेआम मचा देगा दीवान और गांव वालों की लड़ाई अब एक कुंवारी लड़की के सम्मान की भी थी और गांव के आत्मसम्मान की भी गांव की चौपाल पर पालीवाल ब्राह्मणों की बैठक हुई और 5000 से ज्यादा परिवारों ने अपने सम्मान के लिए रियासत छोड़ने का फैसला ले लिया।

Kuldhara Village

कहा जाता है कि निर्णय लेने के लिए सभी 84 गांव वाले एक मंदिर पर इकट्ठा हो गए और पंचायतों ने फैसला किया कि कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस दीवान को नहीं देंगे सारे गांव वाले रात के सन्नाटे में अपना सारा सामान मवेशी अनाज और कपड़े लेकर अपने घरों को छोड़कर हमेशा के लिए यहां से चले गए और पाली नाम की जगह पर जाकर बस गए और फिर कभी वापस नहीं आए और कुलधरा कुछ यूं वीरान हुआ कि आज परिंदे भी इस गांव की सरहदों में दाखिल होने से डरते हैं

कहते हैं गांव छोड़ते वक्त उन ब्राह्मणों ने इस जगह को श्राप दिया था कि यहां कभी भी कोई बसा नहीं हो पाएगी आपको बता दें के बदलते वक्त के साथ 82 गांव तो दोबारा बस गए लेकिन दो गांव कुलधरा और खाबा तमाम कोशिशों के बाद भी आज तक आबाद नहीं हुए हैं यह गांव अब भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है जिसे दिन की रोशनी में सैलानियों के लिए रोज खोल दिया जाता है

मैं बताना चाहूंगा कि जैसलमेर में आज भी सालिम सिंह की हवेली मौजूद है लेकिन उसे देखने ज्यादा लोग नहीं जाते हैं आइए जानते हैं कि यहां के एक गाइड का कुलधरा के बारे में क्या कहना है ये जो गांव अभी जो आप जो वच देख के आए हैं ये ऐसे चुरिया स विलेज है यह सबसे बड़ा गांव था इसका नाम है कुलधरा गांव है कुलधरा इसको एमटी विलेज बोलते हैं घोस्ट विलेज इसलिए बोलते हैं जो 80 90 साल के जो बुजुर्ग लोग थे ना बताते हैं कि वो भाग नहीं पाए उन्होंने पानी के अंदर नमक डालकर जेर डालकर यहीं मर गए थे वो और इनमें से जो आपने देखा होगा मंदिर है जब मंदिर के अंदर मूर्ति नहीं है मूर्ति जब गांव खाली हुआना तो गांव वाले मूर्ति साथ में लेके गए है

Kuldhara Village

प्रशासन ने इस गांव की सरहद पर एक फाटक बनवा दिया है जिसके पार दिन में तो घूमने आते रहते हैं लेकिन रात में इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता है इस गांव में बने पत्थर के मकान अब धीरे-धीरे खंडहर बन चुके हैं लेकिन इन खंडहरों से अतीत में इस गांव के समृद्ध होने का पता चलता है कुछ घरों में चूल्हे बैठने की जगह और घड़े रखने की जगह की मौजूदगी से ऐसा लगता है जैसे कोई यहां से कुछ समय पहले ही गया है यहां की दीवारों से उदासी का एहसास होता है खुली जगह में बसे होने की वजह से सन्नाटे में सरसराती हुई हवा की आवाज यहां के माहौल को और भी उदास बना देती है इस गांव में एक बावड़ी भी है जिससे गांव के लोग पानी पिया करते थे

यही नहीं बल्कि एक खामोश गलियारे में उतरती कुछ सीढ़ियां भी हैं कहते हैं कि शाम ढलने के बाद अक्सर यहां कुछ कुछ आवाजें सुनाई देती हैं लोग मानते हैं कि वह आवाज 18वीं सदी का वह दर्द है जिससे पालीवाल ब्राह्मण गुजरे थे गांव के कुछ मकान है जहां रहस्यमय परछाई अक्सर नजरों के सामने आ जाती है दिन की रोशनी में सब कुछ इतिहास की किसी कहानी जैसा लगता है लेकिन शाम ढलते ही कुलधरा के दरवाजे बंद हो जाते हैं और दिखाई देता है रूहानी ताकत का एक रहस्यमय संसार

Kuldhara Village

लोग कहते हैं कि रात के वक्त यहां जो भी आया वह हादसे का शिकार हो गया मई 2013 में दिल्ली से भूत प्रेत व आत्माओं पर रिसर्च करने वाली पैरानॉर्मल सोसाइटी की टीम ने कुलधरा गांव में रात बिताई थी टीम ने माना कि यहां कुछ ना कुछ असामान्य जरूर है शाम के वक्त उनका ड्रोन कैमरा आसमान से गांव की तस्वीर ले रहा था लेकिन उस बावड़ी के ऊपर आते ही वोह कैमरा हवा में गोते लगाता हुआ जमीन पर आ गिरा जैसे कोई था जिसे वह कैमरा मंजूर ना हो यह सच है कि कुलधरा से हजारों परिवारों का पलायन हुआ लेकिन यह भी सच है कि कुलधरा में आज भी राजस्थानी संस्कृति की झलक मिलती है

एक दो किसम आ गए थे आप किसम व मैं कच्चे धागे में अच्छा हां जी और उसमें कालो में भी कालो में नहीं था अच्छा अच्छा अ झूठ नहीं होगा नहीं सही है आप कहां से हम आगरा से आगरा से आए आगरा कभी आप नहीं आए जी अच्छा अच्छा 20 साल से आप हो 30 साल से हुए य ये सब रोड वगैरह कब बना यहां पर ये सब अभी ये मालूम नहीं करीब इसको हो गया 17 18 साल 17 18 साल हो गए य अच्छा गेट वगर नवा है गाव यहां से दो डेढ़ किलोमीटर गांव आगे है कुलधरा गांव जो तो लोग आते थे

Kuldhara Village

पहले यहां प पहले समय में मैं अपनी इंडियन लोग कोई नहीं था इंडियन नहीं आते थे विदेशी आते थे सब सब विदेशी लोग इतने आते थे कुलर के अंदर उसको साइट नहीं मिलता तो वो अपना कैप ही कहां लगाए फिल्म अच्छे अच्छे बन गए कल भी फिल्म थी जी कल फिल्म हुई शूटिंग वो कल था ना वो अक्षय कुमार अक्षय कुमार जी वो एक दिन का उसका कशन परमिशन परमिशन लेके आए थे

मैं बताना चाहूंगा कि आप कुलधरा गांव में रोजाना सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक घूम सकते हैं और क्योंकि यह जगह भूतिया मानी जाती है इसीलिए सूर्यास्त के बाद इसके द्वार बंद कर दिए जाते हैं यह जगह जैसलमेर के नजदीक थार रेगिस्तान में होने की वजह से बहुत गर्म रहती है इसीलिए यहां घूमने के सबसे अच्छे महीने दिसंबर और जनवरी के हैं जब आपको यहां गर्मी नहीं लगेगी और धूप से परेशान हुए बिना आप रेगिस्तान में सुनसान पड़े इस कुलधरा गांव को आराम से घूम सकते हैं तो यह था कुलधरा गांव और इससे जुड़ा रोचक इतिहास

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