Gwalior Fort History: आठवीं शताब्दी में बना हुआ यह ग्वालियर का किला जो कि गोपगढ़ मानसिंह पैलेस के अंदर औरंगजेब ने इसी जगह पर अपने भाई मुराद को फांसी पर लटका दिया था और यहीं पर आपको दुनिया का सबसे पुराना टेलीफोन का सिस्टम और बिना बिजली से चलने वाला यह राजा रानी के कमरे में लगा हुआ कुलर का सिस्टम और यहां के मान मंदिर के दीवारों के ऊपर हीरे जवारा जड़े हुए थे। जिसे इब्राहिम लोदी ने लूट लिया था और यहां के जहांगीर महल के अंदर जिन राजाओं को कैद करके रखा जाता था।
उनसे इसी जगह पर आटे की चक्की पिसवा जाती थी और तु स्मश के युद्ध के बाद में सभी रानियों और दास ं ने इसी कुंड में जहर किया था। और यहां के विक्रम महल के अंदर आपको उस जमाने का शाही हमाम खाना यानी कि स्नान घर और शौचालय आज भी देखने को मिलता है। नागर शैली में बना हुआ खूबसूरत नकाशी काम से सुसज्जित यह सास बहू का मंदिर और यहां का मार्वल अस आर्किटेक्चर वाला यह तेल का मंदिर देखने के बाद आपका मन प्रसन्न हो जाएगा।

ग्वालियर किले का इतिहास
आज का हमारा सफर मध्य प्रदेश में स्थित इस ग्वालियर किले का होने वाला है। यहां पर आपको मुगलों के जमाने का प्रवेश द्वार नजर आएगा और बाद में जब जहांगीर गद्दी पर बैठा तब उसने इस जगह को कैद खाने में परिवर्तित कर दिया इसी जगह पर जहांगीर ने जो राजा टैक्स नहीं दिया करते थे। उन सभी 52 राजाओं को और सिख धर्म के छठवें गुरु गुरु हरगोविंद साहब जी को इन खंभों से जंजीरों से बांधकर सभी को यहां पर कैद करके रखा हुआ था। बाद में गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने जहांगीर से सभी 52 राजाओं को छुड़वाया था।
इसलिए उनको दाता बंदी छोड़ कहा जाता है और उनका यहां पर गुरुद्वारा भी बना हुआ है। शिव मंदिर के सामने आपको यह 80 खंभों वाली बावड़ी नज़र आएगी। इसी कुए का पानी राजा मान सिंह जी शिव मंदिर के पूजा पाठ के लिए प्रयोग किया करते थे और इस कुए में जाने के लिए रास्ता भी बना हुआ है। तोमर वंश के राजा मानसिंह जी ने यह पैलेस अपने नौ रानियों में से आठ रानियों के लिए बनवाया था और इस पैलेस के गुंबद के ऊपर सोने की प्लेट्स लगी रहती थी।

मान मंदिर पैलेस की शाही कहानी
और इस पैलेस के दीवारों के ऊपर मीनाकारी कला से टेराकोटा टाइल्स के द्वारा यह खूबसूरत पेंटिंग्स बनाई गई है। जो कि 500 साल पुरानी है और इसकी खूबसूरती आज भी बरकरार है पैलेस के सामने आपको यह जो छतरी नजर आ रही है। इस छत्री में राजा मानसिंह जी बैठकर दीवाने आम यानी कि राज्य की आम जनता के प्रश्न को और उनको न्याय देने का काम इसी जगह पर राजा किया करते थे और इस दीवार के ऊपर आपको यह जो खिड़कियां नजर आ रही है। इन झांकियों में बैठकर रानियां राजा की न्याय व्यवस्था देखती थीं।
राजा मानसिंह के पैलेस के अंदर आने के बाद आप यहां के दरबार यानी कि राजा के दीवाने खास में पहुंच जाओगे यहां पर राजा मानसिंह के आठ रानियों के लिए यह विशेष संगीत कक्ष बना हुआ है और इस कक्ष के ऊपर की तरफ आपको यहां पर यह जो जालियां नजर आ रही है। इसी जगह पर रानियां बैठा करती थी और इसके निचले हिस्से में इसी जगह पर संगीतकार बैठा करते थे और संगीतकारों को रानियों को देखने की इजाजत नहीं होती थी।

क्योंकि उस जमाने में राजपूत ट्रेडीशन हुआ करता था तो किसी को भी रानियों को देखने की इजाजत नहीं होती थी। यहां पर आपको यह खूबसूरत नक्काशी से बना हुआ यह वाला कक्ष नजर आएगा जो कि शिव जी का मंदिर है। जिसे मां मंदिर कहा जाता है और इस मंदिर को मान सिंह तोमर ने आठ रानियों के लिए बनवाया था और इस मंदिर के अंदर आपको यह 33 झरोके नजर आएंगे। इन झरोके के अंदर ब्रह्मा विष्णु महेश इन भगवानों की सोने की प्रतिमाएं हुआ करती थी और रानियां इस मंदिर के अंदर परिक्रमा करने के बाद शिवजी की पूजा किया करती थी।
राजा का दरबार और रानियों का संगीत कक्ष
और इस मंदिर की दीवारों के ऊपर सोना, चांदी, हीरे जड़े हुए थे। बाद में 1523 में इब्राहिम लदी ने यह सब लूट लिया था। सीढ़ियों से उतरते हुए अभी हम इस किले के जमीन के अंदर बने हुए पहले मंजिल की तरफ जा रहे राजा मान सिंह का यह पैलेस कुल छह मंजिल का बना हुआ है। जिसमें से तीन मंजिल जमीन के अंदर है और यहां पर आने के बाद इस वाले कक्ष में आपको ऊपर की तरफ यह आठ कुंडिया नजर आएगी। इस जगह पर आठ झूले हुआ करते थे। गर्मी के मौसम में राजा की आठों रानियां इस जगह पर झूला झूला करती थीं।

बाद में यह किला जब मुगल शासन में गया तब औरंगजेब ने इस जगह को फांसी घर में परिवर्तित कर दिया और औरंगजेब ने अपने भाई मुराद को इसी जगह पर फांसी पर लटका दिया था। अभी हम जमीन के अंदर बने हुए दूसरी मंजिल पर स्थित इस कक्ष के अंदर हैं। जब भी राजा युद्ध पर और शिकार पर जाया करते थे। तब राजा के सभी रानियां इस कक्ष में खड़े होकर राजा की प्रतीक्षा किया करते थे और इस कक्ष से आपको यह वाली खिड़की नजर आएगी और इस खिड़की से बाहर देखने पर आपको यह वाला झंडा नजर आएगा।
मान मंदिर की खूबसूरत सजावट
जब भी राजा युद्ध को हार जाते थे तो इस झंडे को नीचे किया जाता था बाद में 1523 में जब इब्राहिम लोधी ने इस राज्य पर आक्रमण किया तब राजा मानसिंह जी की मृत्यु हो चुकी थी और इस झंडे को नीचे किया गया था और नीचे किए हुए झंडे को देखने के बाद सभी रानियों को पता चला कि राजा मान सिंह की मृत्यु हो चुकी है इब्राहिम लोदी के सैनिकों ने रानियों को उठाकर लेकर जाने के लिए इस पैलेस पर हमला बोल दिया था।

यह सब देखकर सभी रानियों ने इस पैलेस के तीसरे मंजिल पर स्थित इस कक्ष के अंदर इस वाले कुंड में जोहर किया था और जोहर करने से पहले यह वाला कक्ष रानी का बहुत ही बड़ा स्नान घर हुआ करता था। पानी को कुंड में से निकालकर उसमें चंदन की लकड़ियां डालकर रानियों ने अग्नि में अपनी आहुति दी और इस किले का यह दूसरा जोहर है। जोहर कुंड वाले इस कक्ष के अंदर राजा मानसिंह जी के जमाने का यह वाला आपको टेलीफोन सिस्टम नजर आएगा।
ग्वालियर किले का रहस्यमयी टेलीफोन सिस्टम
चूने और मिट्टी से बना हुआ 3 इंच के पाइप के जरिए यह इंटरकॉम टेलीफोन सिस्टम सभी रानियों के कमरे से जुड़ा हुआ था और इसके जरिए राजा अपने सभी रानियों से बातचीत किया करते थे। अभी हम मानसिंह पैलेस के दूसरे आंगन में आ चुके हैं और यहां पर भारत ममन करने के लिए आए हुए चाइनीज व्यापारियों के जरिए यहां पर रंग महल का निर्माण करवाया गया था। इसलिए इस जगह पर आपको यह चाइनीज ड्रैगन और यहां की छत भी आपको चाइनीज शैली के द्वारा निर्मित दिखाई देती है।

और यह वाली जगह राजा मान सिंह जी के जमाने में ओपन डांसिंग हॉल हुआ करता था इसी रंग महल के अंदर आपको 500 साल पुराना कूलर का सिस्टम देखने को मिलता है यह जगह गर्मियों के मौसम में राजा और रानियों का बेडरूम हुआ करता था और इस जगह पर दो फैन की प्लेट्स लगी रहती थी। 350 फीट की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण जब हवाएं दीवार से टकराकर चलती थीं। तब बाहर की प्लेट घूमने के कारण अंदर की भी प्लेट घूमती थी।
बिना बिजली वाला पुराना Cooling System
और इस जगह पर गुलाब और केसर के मिक्सचर का पानी डाला जाता था और इसके ऊपर खसखस की जाली लगी रहती थी और जब हवा चलती थी तो खुशबू हवा के साथ में आती थी तो यह एयर कूलिंग सिस्टम था। उस जमाने का राजा मानसिंह जी का पैलेस देखने के बाद अभी हम इस कर्ण महल पर आए हैं और यह जो कर्ण महल है यह राजा मानसिंह के पैलेस से भी 100 साल पूराना ।है चार मंजिल के बने हुए इस कर्ण महल को राजा मान सिंह जी के पिताजी कर्ण सिंह तोमर के द्वारा बनवाया गया था।

और यह इस किले का सबसे पहला और सबसे पुराना बना हुआ महल है और इस महल की खास बात यह है कि इसके तय खाने में 600 साल पुरानी यह पेंटिंग्स के कलर और यहां का शाही अमाम खाना यानी कि स्नान घर और शौचालय का आर्किटेक्चर आपको आज भी यहां पर देखने को मिलता है। कर्ण महल के पास में आपको यह जहांगीर का महल नजर आएगा जब यहां पर मुगलों का शासन आया तब जहांगीर ने जो राजा विद्रोह करते थे उन राजाओं को और लोगों को इसी जहांगीर महल में कैद करके रखा हुआ था।
भारी भरकम पत्थरों से बनी हुई आटे की चक्की
और उनको इसी जगह पर यातनाएं देते हुए भारी भरकम पत्थरों से बनी हुई आटे की चक्की चलवाई जाती थी जहागीर महल के ऊपर से देखने के बाद किले के नीचे आपको यह छोटा सा महल नजर आएगा जिसे गुजरी महल कहते हैं और मानसिंह राजा की नौ रानियां थी उनमें से नौवी रानी जिनका नाम रानी मृगनका द थी मेरे पीछे यह जहांगीर महल है और इस महल से बाहर आने के बाद यहां पर आपको यह बड़ा सा पानी का कुंड नजर आएगा यह यहां का जोहर कुंडे इस किले में 1232 के आसपास में जब राजा बृंग देव जी युद्ध हार चुके थे और उनका दयात हो चुका था

तो उनके जितने भी रानियां थी और उन रानियों के जितने भी दासिया थी उन सभी लोगों ने इस जगह पर जोहर किया था मेरे पीछे आपको यह जो छतरी नजर आ रही है यह भीम सिंह राणा जी की छतरी है जो जाट वंश के राजा थे और उनका युद्ध करते वक्त देहांत हो गया था और उनका जो अंतिम संस्कार है वह इसी जगह पर किया गया था तो उनके याद में यहां पर यह छत्री बनाई गई है नागर शैली में बने हुए यह दो सास बहू के मंदिर देखे बगैर आपकी ग्वालियर की यात्रा अधूरी रह सकती है।
तेली का मंदिर
11वीं शताब्दी में राजा महिपाल ने इन दोनों मंदिर का निर्माण अपने मां और पत्नी के लिए करवाया था और यह जो आप बड़ा सा मंदिर देख रहे यह सास का मंदिर है जिसे इंटरलॉकिंग सिस्टम के तहत बनवाया गया था और इस मंदिर के गर्भगृह में कभी भगवान विष्णु जी विराजमान हुआ करते थे साज के मंदिर से बाहर आते ही सामने आपको यह बहू का मंदिर नजर आता है इस खूबसूरत मंदिर के गर्भगृह में किसी जमाने में भगवान शिव जी विराजमान हुआ करते थे।

इसकी अति सूक्ष्म नक्काशी को देखकर आपका मन प्रसन्न हो जाएगा। यह दोनों मंदिर बहुत ही खूबसूरत है लेकिन आज इनका गर्भ ग्रह सूना पड़ा हुआ है सास बहू के मंदिर से कुछ ही दूरी पर यह तेली का मंदिर बना हुआ है। जिसे तेलंगना मंदिर कहते हैं। द्रविड़ियन शैली में बना यह मंदिर नवी सद यानी कि 1100 साल पुराना है। इस मंदिर को राजा महि भोज के द्वारा निर्माण करवाया था और इस मंदिर के गर्भ ग्रह में किसी जमाने में भगवान विष्णु विराजमान हुआ करते थे और आज इस मंदिर का गर्भगृह सूना पड़ा हुआ है। ग्वालियर के इस किले को घूमने के लिए पा घंटे से भी ज्यादा समय लग सकता है।

